छोटी सी ज़िन्दगी में उलझने हज़ार ,
सुलझाने जाएं तो आ जाता है भुखार |
उलझन एक हो तो समझ भी आये ,
हर कदम पर उलझन हो तो आगे बढ़ने से दिल घबराये ||

हवा तेज़ चले तो सुलझे हुए बाल भी उलझ जाते है ,
और जब आंधी नफरत की चले तो अच्छे अच्छे रिश्ते भी भिखर जाते है |

कपड़ो के रंग से कैरियर की जंग तक ,
बचपन के पालने से मृत्यु के पलंग तक ,
खट्टी मीठी उलझनों से हार किसने मानी है ,
सुलझाते हुए इन्हे सभी ने ज़िन्दगी अपनी बितानी है ||

Ig- saahi_avid_writer

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