लिख पाऊं कुछ इसकी शान में इतनी
मेरी औकात कहां,
समेट ले चंद अल्फाजों में कलम में ऐसी बात कहां।

नाम इसका सुनते ही खून मेरा खौल जाता है,
खून का हरेक कतरा हिंदुस्तान हिंदुस्तान चिल्लाता है।

वीरों के बलिदान का रंग केसरी इसमें समाता है,
हौंसले की हवा मे ये बेबाक लहराता है।

शांति के लिए न्योछावर हो गए कई,वीर महात्मा,
मानो तिरंगे में ही बस्ती है आज भी उनकी आत्मा…..

देश के किसान, नौजवान,सीमा पर खड़े फौजी महान,
पूरा इसे बनाते है,
बात हो वतन की,भूल जात पात सब एक हो
जाते है….

बीच में लगा कर्तव्य का पहिया अपनी अलग महिमा गाता है,
मानव उन्नति के चौबीस धर्म मार्ग दर्शाता है…

सिर्फ तीन रंगों का मेल नहीं हूं मै,
कई शौर्य गाथाएं मुझमें समाई है।
रखने लाज मिट्टी की,शूरवीरों ने
हंसते हुए जान अपनी गंवाई है।

यूं ही नहीं लहराता मै,

कई शूरवीरों ने अपने लहू से
मुझको सींचा है,
त्याग समर्पण,की महानता ने
मेरी डोरी को खींचा है।

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